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श्री बद्रीनाथ जी धाम के कपाट बंद, मनोरम दृश्य
November 18, 2019 • सतोपथ एक्सप्रेस • देश

https://youtu.be/q1_rUoGzXY4

बदरीनाथ धाम से संजय कुँवर
पारम्परिक विधि विधान एवं मंत्रोचारण के साथ "बदरी विशाल भगवान की जय के जयकारे के बीच भगवान श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट आज 17 नवंबर की सायं 5ः13 बजे शीतकाल के लिए बंद किए दिए गए। इस मौके पर 9 हजार, 135 श्रद्धालुओं ने भगवान बद्रीनाथ जी के दर्शन किए। पूरे यात्राकाल में इस वर्ष 12 लाख, 33 हजार, 938 तीर्थयात्रियों ने भगवान बद्रीनाथ जी के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। 
इस वर्ष भगवान श्री बद्रीनाथ जी की यात्रा कई मायनों में खास रही। देश के मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मा0 राज्यपाल उत्तराखण्ड श्रीमती बेबी रानी मौर्य, मानव संशाधन एवं विकास मंत्री भारत सरकार रमेश पोखरियाल निशंक, मा0 केन्द्रीय मंत्री उमा भारती, रिलायंस कंपनी के चैयरमेन मुकेश अंबानी, थल सेना अध्यक्ष विपिन रावत, मा0 सांसद तीरथ सिह रावत, मा0 मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, स्वामी रामदेव सहित कई अति विशिष्ट और विशिष्ट लोगों ने भगवान बद्री नारायण के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। वही इस वर्ष लाखों देश विदेश के श्रद्धालु भी बद्रीनाथ धाम पहुॅचे।
बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के अवसर पर चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया, पुलिस अधीक्षक यशवंत चैहान, सीडीओ हंसादत्त पांडे, एडीएम एमएस बर्निया सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।  
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट
 पर शीतकाल के लिए बंद हुए।
* कपाट बंद होने तक आज 9हजार 135 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे।
*  इस यात्रा वर्ष कुल 1240929 तीर्थयात्री  भगवान बद्रीविशाल के दर्शन को पहुंचे।
 श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट आज रविवार, कर्क लग्न में शायंकाल  5 बजकर 13 मिनट को शीतकाल हेतु बंद कर दिये गये।
प्रात:तीन बजे भगवान बद्रीविशाल का मंदिर खुल गया था 3.30 बजे से अभिषेक पूजा शुरू हुई 7.30 बजे बाल भोग के पश्चात  दर्शन  एवं प्रात:कालीन आरतियां शुरू हुई।
इसके बाद राज भोग चढ़ाया गया। पुनः दर्शन चलते रहे आज दिन के भोग के बाद मंदिर बंद नहीं किया गया दिन भर मंदिर दर्शन हेतु खुला रहा। आज मंदिर परिसर में मंदिर समिति ने भगवान बद्रीविशाल के क्षेत्रपाल श्री घंटाकर्ण महाराज जी एवं हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की एवं प्रसाद चढ़ाया।
3.30 बजे  से   रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी द्वारा कपाट बंद करने की रश्म -प्रक्रियायें  पूरी की गयी। श्री उद्धव जी को मंदिर गर्भगृह से बाहर लाया गया तत्पश्चात  स्त्री भेष धारण कर मां लक्ष्मी को भगवान बद्रीविशाल के सानिध्य में विराजमान किया इसके बाद श्री कुबेर जी मंदिर गर्भगृह से बाहर मंदिर  परिसर में पहुंचे।
   इसके पश्चात रावल जी द्वारा भगवान बद्रीविशाल को घृतकंबल ओढ़ाया गया। ठीक 5 बजकर 13 मिनट पर प्रशासन की उपस्थित में रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी द्वारा  कपाट शीतकाल हेतु बंद कर दिये गये।
 इस अवसर हेतु बद्रीनाथ मंदिर को भब्यरुप से फूलों से सजाया गया है। इस अवसर पर 9हजार135   तीर्थयात्रियों ने दर्शन किये। इस यात्रा वर्ष 12लाख 40हजार 929 तीर्थयात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को भब्यरुप से फूलों से सजाया। इस दौरान  पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र भंडारी, जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी,केदारनाथ विधायक मनोज रावत, पूर्व विधायक ललित फरस्वाण, मंदिर समिति पूर्व सदस्य हरीश डिमरी, भाष्कर डिमरी, शिव प्रसाद डिमरी, जगदीश भट्ठ   पुलिस -प्रशासन एवं सेना आईटीबीपी के अधिकारी भी  भगवान बद्रीविशाल के दर्शन को पहुंचे।  दानीदाताओं गढ़वाल स्काट, सेना, आईटीबीपी एवं मंदिर समिति द्वारा भंडारे आयोजित किये गये।  कल 18 नवंबर प्रात: 10 बजे   श्री उद्धव जी एवं श्री कुबेर जी का पांडुकेश्वर तथा आदि गुरू शंकराचार्य जी की गद्दी का रावल जी के साथ नृसिंह मंदिर हेतु प्रस्थान एवं रात्रि विश्राम  योग-ध्यान बदरी पांडुकेश्वर  में होगा। 
19 नवंबर प्रात:9.30 बजे  आदि गुरू शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ रावल जी  का  पांडुकेश्वर से नृसिंह मंदिर जोशीमठ आगमन होगा।