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मकान मालिक मांग रहा किराया , पैदल घर जाने को मजबूर
March 27, 2020 • सतोपथ एक्सप्रेस • समाचार
  • मकान मालिक मांग रहा किराया
  • लॉक डाउन से मजदूरो के सामने रोजी रोटी का संकट 
  • पैदल घर जाने को मजबूर
  • बीमार को ले जाया जा रहा ठेले पर ,
  • महिलाएं,बच्चे ,बुजुर्ग पैदल चलने पर मजबूर

जहांगीर मालिक

कई किलोमीटर महिलाओं,बच्चों,बुजुर्गों,बीमारों के साथ हजारों की संख्या में अपने घर जाने को मजबूर काम करने वाले पैदल ही जा रहे हैं। अपने घर हरिद्वार

विश्व भर में कोरोना वायरस की वजह से लगातार इस वायरस के संदिग्धों की संख्या बढ़ती जा रही है और इस वायरस के प्रकोप को कम करने के लिए तमाम तरह के उपाय किए जा रहे हैं भारत सरकार द्वारा संपूर्ण भारत में लोक डाउन किया गया है और इस लोक डाउन की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी का सामना दूसरे राज्यों से आकर मजदूरी करने वाले लोगों को हो रहा है क्योंकि लॉक डाउन होने की वजह इन मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है यह तमाम मजदूर अब अपने-अपने घर वापसी जा रहे हैं मगर इनको कोई संसाधन नहीं मिल पा रहा है जिसकी वजह से यह मजदूर छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ कई-कई किलोमीटर पैदल ही अपने घर जाने को मजबूर है।

हरिद्वार में भी तमाम राज्यों के मजदूर अपना जीवन व्यापन करने के लिए कंपनियों में कार्य कर रहे थे। मगर लोक डाउन होने की वजह से कंपनियों ने मजदूरों की छुट्टी कर दी अब इनके पास ना तो रहने का ठिकाना है और ना ही अपनी पेट की भूख मिटाने का कोई जरिया है। इन मजदूरों को अपने घर जाने के लिए कोई साधन भी नहीं मिल रहा मजबूरी में यह मजदूर अपने पूरे परिवार बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों के साथ कई कई किलोमीटर पैदल ही अपने घर जा रहे है। मजदूरों का कहना है कि लोक डाउन होने की वजह से कंपनियों द्वारा हमें छुट्टी दे दी गई हैं। इस वजह से हमारे पास रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। और जहां पर हम किराए पर रहते हैं। वहां पर भी मकान मालिक द्वारा किराए के लिए हमें परेशान किया जा रहा है। इसी वजह से हम वापस अपने घर जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा हमें घर वापस भेजने कि कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है इसलिए हम पैदल ही अपने घर जाने को मजबूर है शासन प्रशासन को इस तरह के लोगों को अपने घर पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

वही मजदूरों के परिवार की महिलाओं का कहना है कि हमारे खाने की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है और जहां पर हम किराए पर रहते हैं उनके द्वारा हम से किराया मांगा जा रहा है जब काम ही सब बंद हो गए तो हम उनको किराया कैसे देंगे मेरी छह लड़की और एक लड़का है जब कोई कार्य ही नहीं करेंगे तो उनको खाना कहां से खिला पाएंगे हम हरिद्वार से बिजनौर पैदल ही जा रहे हैं मगर प्रशासन द्वारा हमारे लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई सरकार को लोग डाउन लगाने से पहले सभी व्यवस्थाएं करनी चाहिए थी इन मजदूरों के साथ इनके छोटे बच्चे भी पैदल ही चलने को मजबूर है बच्चों का कहना है कि हम अपने मम्मी-पापा के साथ सुबह से पैदल ही चल रहे हैं और हम थक भी गए हैं रास्ते मैं हमारी किसी ने मदद नहीं की हमें भूख भी लग रही है और हमारे पास पैसे भी नहीं है