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चारधाम श्राईन बोर्ड" का विरोध
November 30, 2019 • सतोपथ एक्सप्रेस • देश

जोशीमठ:"चारधाम श्राईन बोर्ड" का विरोध, हक हकूकधारी हुए सरकार से मुखर, 

संजय कुँवर जोशीमठ, 


चार धाम श्राईन बोर्ड के गठन को लेकर बदरीनाथ मंदिर सहित अन्य मंदिर से जुड़े हक हकूक धारियों और तीर्थ पुरोहित समाज सहित मेहता,भंडारी थोक धडिया,सेवाकार चारि से जुड़े सेकडो लोगों में  विरोध के स्वर उठने लगे है पूरा हक हकुक समुदाय सूबे की त्रिवेंद्र सरकार  के खिलाप गुस्से में हैं। प्रदेश सरकार के इस फैसले से विवाद में पड़ते ही चारधाम से जुड़े हक-हकूकों पर गहमा गहमी भी शुरू हो गई है,परम्परा के मुताबिक यात्राकाल शुरू होने से समाप्त होने तक बदरी नाथ धाम की तमाम पूजा अर्चना से लेकर भोग प्रसाद,भंडार,आरती,परिक्रमा पथ के मंदिरो की वृती के साथ ब्रह्म कपाल, तप्त कुंड,में तीर्थ पुरोहितों की हक हकूक हर साल की तरह वर्षों से  चले आ रहे हैं हजारों परिवार श्री बदरीनाथ धाम  के कपाट खुलने  पर  बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को सहयोग  के तौर पर अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं  ऐसे में  इन हक हकूक धारी लोगों का कहना है की चार धाम श्राइन बोर्ड  के गठन के बाद कहीं ना कहीं बद्रीनाथ मंदिर सहित अन्य सभी मंदिर से जुड़े तमाम हक हकूको से वो हाथ धो बैठेंगे,ऐसे में  बद्रीनाथ सहित पांडुकेश्वर जोशीमठ के नरसिंह नव दुर्गा मंदिर के हक हकूक धारी धड़िया, सेवाकार भंडारी, सहित भंडारी मेहता थोक के लोगों में श्राइन बोर्ड के खिलाफ गहरा आक्रोश है जिसको लेकर हक हकूक धारियों द्वारा सरकार के खिलाफ लंबी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी गई है और हक हकूक धारियों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही सनातनी परंपरा का बाजारीकरण कर सरकार अच्छा नहीं कर रही है जिस का पुरजोर विरोध किया जाएगा,बता दें कि पांडुकेश्वर  के मेहता और भंडारी थोक से जुड़े लोगों ने लगभग 226 नाली जमीन दान में दी है । जो मौजूदा समय में  श्रीबद्रीनाथ-केदारनाथ की सम्पत्ति है। कहा  सम्पत्ति इसलिये दान में दी की मंदिर से जुड़ी परम्परा में वो भी हिस्से दार रहें, धार्मिक मान्यता और हक-हकूक से ही आजतक मंदिर संचालित होते रहे  हैं।कहा की सरकार सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस व्यवस्था से छेड़छाड़ करेगी तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा'।