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बिल्केश्वर महादेव की आराधना से समाप्त होगा कोरोना वायरस-दिगंबर बलवीर पुरी
June 11, 2020 • सतोपथ एक्सप्रेस • समाचार

विक्की सैनी

हरिद्वार,। ईश्वर की आराधना से ही मनुष्य भवसागर से पार हो सकता है और भगवान की शरण में रहकर ही किसी भी महामारी को हराया जा सकता है। उक्त उदगार बिल्व पर्वत स्थित बिल्वकेशवर महादेव मंदिर के व्यवस्थापक दिगम्बर बलवीर पुरी महाराज ने मंदिर परिसर में व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वरीय कृपा से कोरोना वायरस का प्रकोप जल्द ही समाप्त होगा। पापनाशक एवं सकलफल दायक भगवान बिल्वकेशवर महादेव की कृपा मात्र से ही पापो की निवृति व पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रंगार कर आरती की गयी व विश्व को कोरोना वायरस से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की गयी। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में कोरोना वायरस से बचाव के लिए सेनेटाइजिंग टनल लगायी गयी है। जिसमें होकर ही श्रद्धालु भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे साथ ही सोशल डिसटेंसिग का पालन करते हुए एक बार में पांच श्रद्धालु भक्त ही महादेव के दर्शन कर सकेंगे। दिगम्बर बलवीर पुरी महाराज ने कहा कि ईश्वरीय कृपा दृष्टि से ही कोरोना समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि पौराणिक सिद्ध पीठों, मठ मंदिरों के अलावा अपने घरों में भी सच्चे मन से श्रद्धालुओं को प्रार्थनाएं करनी चाहिए। परिवारों के कष्टों को दूर करना है तो भक्त को भगवान की शरण में आना ही होगा। भगवान भोलेनाथ भक्त की सूक्ष्म आराधना से ही प्रसन्न होकर ही मनवांछित फल देते हैं। देवो के देव महादेव के नाम का सिमरन करने से ही भक्त के कष्ट स्वतः ही दूर हो जाते हैं। भगवान शिव को रूद्राभिषेक व जलाभिषेक करने वाले भक्त बहुत ही प्रिय हैं। उन भक्तों को अवश्य ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। बिल्केश्वर महादेव मंदिर में अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए भक्त मंदिर में पूजा अर्चना व अनेकों अनुष्ठान कर भगवान शिव की कृपा को प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य कल्याण में सभी को अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए। दीन दुखियों की मदद के लिए प्रत्येक नागरिक को कर्तव्य निष्ठा से अंजाम देना चाहिए। यह समय मानव सेवा का है। गरीब असहाय निर्धन निराश्रितों की मदद करते हुए ईश्वर भक्ति में अपना समय बिताएं। इस दौरान मंदिर पुजारी दिगंबर सुधीर पुरी, दिगंबर पुनीत पुरी, दिगंबर नितेश पुरी, दिगंबर अखिलेश पुरी, दिगंबर कर्णपुरी, स्वामी वीरेंद्र पुरी, स्वामी रजनीश पुरी, स्वामी किशोर पुरी आदि मौजूद रहे।