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अपनी सेवा से मुंह मोड़ रहे आयुर्वेद के शिक्षक-चिकित्सक
April 15, 2020 • सतोपथ एक्सप्रेस • समाचार
  • जब इस महामारी के दौर में  देश का हर नागरिक अपना योगदान दे रहा है
  • वहीं अपनी सेवा से मुंह मोड़ रहे आयुर्वेद के शिक्षक-चिकित्सक

देवेंद्र शर्मा हरिद्वार

हरिद्वार के सबसे बड़ा क्वारंटाईन सैंटर ऋषिकुल आयुर्वेद कालेज एवं चिकित्सालय है जहां सौ से लोगों को क्वारंटाईन पर रखा गया है। कालेज के पास ढाई दर्जन से अधिक पेशेवर शिक्षक व चिकित्सक हैं, जो महामारी के दौर में जब देश का हर नागरिक अपना योगदान दे रहा है और बढ़ -चढ़ कर आगे आ रहा है आयुर्वेद के शिक्षक-चिकित्सक मुंह मोड़ रहे हैं। यूजीसी वेतनमान के साथ मोटी तनख्वाह लेने वाले आयुर्वेद कालेज प्रशासन ने अपने संवर्ग को ड्यूटी से अलग रख पीजी छात्रों को क्वारंटाईन केंद्र की ड्यूटी पर लगा दिया था जो नियमानुसार ईलाज करने के लिए अधिकृत भी नहीं हैं। यही नहीं फार्मेसिस्टों के साथ दरियादिली दिखाते हुए उन्हें भी घर में बैठा रखा है। कालेज प्रशासन ने केवल नर्सेज संवर्ग के कार्मिकों को क्वारंटाईन केन्द्र में ड्यूटी पर झोंक रखा है। भारत सरकार ने महामारी से बचाव में आयुष चिकित्सकों की भूमिका को रेखांकित किया है। आयुर्वेद चिकित्सक-शिक्षक प्रायः अपनी उपेक्षा का रोना रोते रहे हैं, लेकिन जब राष्ट्र धर्म को निभाने और मानवता की सेवा में परीक्षा की घड़ी आई तो ड्यूटी से बच रहे हैं। कालेज प्रशासन के इस रवैये से नाराज पीजी छात्रों ने भी आज ड्यूटी से इन्कार कर दिया है। अपने संवर्ग को ड्यूटी से बचाने के लिए चिकित्सा अधीक्षक ओपी सिंह न ने छात्रों को हर प्रकार से मनाने की कोशिश की लेकिन वे विधा के पेशेवर शिक्षक चिकित्सक के बिना ड्यूटी के लिए राजी नहीं हैं। चंपावत जिले में जिलाधिकारी ने जहां पशु चिकित्सकों को भी प्राथमिक प्रशिक्षण देकर कोरोना के ईलाज के लिए टीम खड़ी कर दी है वहीं आयुर्वेद चिकित्सक तैयार करने वाले ऋषिकुल कालेज प्रशासन का रवैया आश्चर्यजनक ही नहीं सरकार के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहा है।